किसान कार्ड बनवाना ही काफी नहीं, जमीन लिंक और ई-केवाईसी के बिना नहीं मिलेगा पूरा लाभ आजकल बहुत से किसान भाई किसान कार्ड या फार्मर रजिस्ट्रेशन तो करवा लेते हैं, लेकिन उसके बाद के जरूरी काम अधूरे छोड़ देते हैं। यही वजह है कि बाद में खाद लेने, टोकन निकालने या फसल बेचने के समय परेशानी सामने आती है।
असल में अब सिर्फ रजिस्ट्रेशन करना ही काफी नहीं है। आपको अपनी पूरी जमीन सही तरीके से जुड़वानी होगी और समग्र आईडी से लिंक करना भी जरूरी है। इसके साथ ही भू-अभिलेख की नई व्यवस्था में ई-केवाईसी कराना भी अनिवार्य हो गया है।
कई किसान भाई पहले कम जमीन दिखाकर कुछ योजनाओं का लाभ लेते थे, लेकिन अब नई व्यवस्था में पूरा रिकॉर्ड सामने आ रहा है। अगर आपके सभी खसरे दर्ज नहीं हैं, तो सिस्टम में आपकी जमीन कम दिखेगी और उसी हिसाब से आपको खाद या अन्य सुविधा भी कम मिलेगी।
इसी कारण आज गांव-गांव में सर्वे हो रहा है और पटवारी या सेंटर वाले सभी रिकॉर्ड सही करवा रहे हैं। अगर अभी ध्यान नहीं दिया तो बाद में फसल बेचने, खासकर गेहूं जैसी रबी फसल के समय दिक्कत आ सकती है।
इस पोस्ट में हम आपको आसान भाषा में समझाएंगे कि किसान रजिस्ट्रेशन के बाद क्या-क्या काम जरूरी हैं, क्यों जरूरी हैं और कैसे आप इन गलतियों से बच सकते हैं।
| जरूरी काम | क्या करना है | नहीं करने पर समस्या |
|---|---|---|
| किसान रजिस्ट्रेशन | किसान कार्ड / फार्मर आईडी बनवाना | सरकारी योजनाओं में नाम नहीं आएगा |
| जमीन लिंक करना | समग्र आईडी से पूरी जमीन जोड़ना | जमीन कम दिखेगी, लाभ कम मिलेगा |
| खसरा अपडेट | सभी खसरे सही दर्ज करवाना | खाद और टोकन कम मिलेंगे |
| ई-केवाईसी | भू-अभिलेख साइट पर केवाईसी करना | फसल बिक्री और योजनाएं रुक सकती हैं |
| फसल पंजीयन | रबी/गेहूं बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन | समर्थन मूल्य पर फसल नहीं बिकेगी |
1. किसान भाइयों ध्यान दें रजिस्ट्रेशन के बाद ये काम नहीं किए तो नहीं मिलेगा खाद और फसल बेचने का मौका
आज के समय में सिर्फ किसान रजिस्ट्रेशन करवा लेना ही काफी नहीं है। बहुत से किसान भाई यहीं पर रुक जाते हैं और आगे के जरूरी काम नहीं करते, जिसके कारण बाद में उन्हें खाद लेने या फसल बेचने में परेशानी उठानी पड़ती है। दरअसल अब व्यवस्था पूरी तरह ऑनलाइन हो गई है। अगर आपकी जमीन सही तरीके से जुड़ी नहीं है, खसरे पूरे दर्ज नहीं हैं या ई-केवाईसी नहीं हुई है, तो सिस्टम में आपकी जानकारी अधूरी मानी जाएगी। ऐसे में जब आप खाद लेने जाएंगे तो टोकन जेनरेट करवाते है तो आपको कम खाद दिखता है और परेशान हो जाते है।
इसी तरह अगर आप गेहूं या दूसरी फसल मंडी में बेचने के लिये रजिस्ट्रशन करवाते है तो जमीन कम बताता है और अधूरी जानकारी होने पर आपका नाम सूची में नहीं आ पता है फसल बेचने में दिक्कत होगी। इसलिए जरूरी है कि रजिस्ट्रेशन के बाद अपनी पूरी जमीन लिंक करवाएं, सभी खसरे सही दर्ज करवाएं और समय पर ई-केवाईसी पूरा करें। ये छोटे-छोटे काम आगे चलकर बड़े नुकसान से बचाते हैं।
2. किसान सम्मान निधि का लाभ लेना है तो रिकॉर्ड सही होना जरूरी
बहुत से किसान भाई ये सोचते हैं कि सम्मान निधि अपने आप आती रहेगी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अगर आपकी जमीन का रिकॉर्ड सही नहीं है या समग्र आईडी से लिंक नहीं है, तो किस्त रुक सकती है। सरकार अब हर जानकारी को मिलान करके देख रही है, इसलिए जरूरी है कि आपका नाम, आधार और जमीन की जानकारी एक जैसी हो।
3. बही,भूअधिकार पुस्तिका में नाम और आधार में अंतर है तो पहले सुधार करवाएं
कई बार किसान की बही जमीन रिकॉर्ड में नाम अलग होता है और आधार में अलग। पहले ये चल जाता था, लेकिन अब सिस्टम में मिलान जरूरी हो गया है। अगर नाम में फर्क है तो ई-केवाईसी या रजिस्ट्रेशन पूरा नहीं होगा और आगे समस्या आएगी। इसलिए पहले नाम सही करवाना जरूरी है।
4. गांव में सर्वे के समय लापरवाही न करें
अभी गांव-गांव में सर्वे हो रहा है, जिसमें पटवारी और ऑपरेटर किसान का रिकॉर्ड सही कर रहे हैं। कई किसान इस समय ध्यान नहीं देते या जानकारी छुपा लेते हैं, कई किसान भाई कोई चिंता नहीं होती खेती बाड़ी के काम में ही व्यथ है, बुलाने पर भी कोई ध्यान नहीं देता जिससे आगे चलके परेशानी होती है। जिससे बाद में वही गलती सिस्टम में रह जाती है और नुकसान होता है। सर्वे के समय अपनी पूरी जमीन और सही जानकारी जरूर दें। जिससे आप भी योजनाओं का पूरा पूरा लाभ ले सके।
5. कम जमीन दिखाने की आदत अब नुकसान दे रही है
पहले कुछ किसान योजनाओं का लाभ लेने के लिए कम जमीन दिखाते थे, लेकिन अब पूरा डेटा ऑनलाइन जुड़ रहा है। अगर आपकी असली जमीन ज्यादा है और रिकॉर्ड में कम है, तो खाद कम मिलेगा वहा भी आपको दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा टोकन में कम खाद की बोरी दिखायेगा मिलेगा फसल बेचने में दिक्कत होगी रजिस्ट्रशन कम खसरे का होगा और आप योजना लाभ जैसे MSP से वचित रह जायेंगे इसलिए अब सही जानकारी देना ही फायदा देगा।
6. खाद यूरिया, डीएपी MOP लेने के लिए सही डेटा जरूरी
अब खाद लेने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन हो गई है e-Token सिस्टम आ गया है सिस्टम में जितनी जमीन दिखेगी, उसी हिसाब से खाद मिलेगा अगर जमीन कम दिख रही है तो आप चाहे जितनी कोशिश करें, ज्यादा खाद नहीं मिलेगा। हेक्टेयर के हिसाब से दी जाएगी जिससे आपको परेशानी का सामना करना पड़ेगा
7. कहां जाकर कराएं ये सभी काम
अगर आपको ये सब काम समझ नहीं आ रहा है तो आप यहां संपर्क कर सकते हैं अपने नजदीकी सीएससी सेंटर एमपी ऑनलाइन केंद्र पटवारी
ग्राम सर्वेयर गाँव कोटवार या पंचायत कार्यालय, तहसील कार्यालय अभी भी समय पर काम करवा ले जिससे आगे कोई परेशानी से बचा जा सकता है।
8. डिस्क्लेमर
यह जानकारी हमारे व्यक्तिगत अनुभव और रोज़ाना किसानों के साथ काम करने के आधार पर दी गई है। हम एक सीएससी सेंटर संचालित करते हैं और किसान से जुड़े काम जैसे रजिस्ट्रेशन, जमीन लिंक, ई-केवाईसी आदि करते हैं। हमारे पास रोजाना कई ऐसे किसान भाई ऐसी समस्याएं लेकर आते हैं,
जैसे जमीन कम दिखना, खाद कम मिलना, टोकन में दिक्कत या फसल बेचने में परेशानी। इन्हीं वास्तविक अनुभवों के आधार पर यह जानकारी सरल भाषा में आपके साथ साझा की गई है, ताकि आप समय रहते अपनी जानकारी सही करवा सकें और किसी भी परेशानी से बच सकें।












